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प्रदूषण के प्रकार और प्रदूषण से बचाव

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प्रदूषण
Image Credit : Pixabay (GDJ)

ज की इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हर आदमी अपना जीवन आसान बनाना चाहता है और अपनी ज़िन्दगी को आसान बनाने के लिए वह हर चीज करने के लिए तैयार है, चाहे इससे पर्यावरण को लाभ हो या हानी इससे किसी को कोई फर्क नही पड़ता। आज इन्सान स्वार्थी हो गया है, वो सिर्फ अपने बारे मे ही सोचता है। इसी स्वार्थ के कारण पृथ्वी आज रो रही है। आज पृथ्वी को उसके सन्तानों ने ही इतना दुख पहुँचाया है कि आज पृथ्वी तड़प रही है।

मानव की इसी स्वार्थ के कारण उसका अस्तित्व खतरे में है। यह खतरा इत्ना बड़ा है जिसके कल्पना मात्र से ही रूह काँप उठती है। आज मानव ने पृथ्वी को पूर्णतः दूषित कर दिया है। पृथ्वी को हमने विभिन्न तरीकों से प्रदूषित किया है। जैसे:-

वायु प्रदूषण:-

हमने अपने सुख सुविधाओं के लिए वायु को इतना प्रदूषित किया है की हमें साँस लेने में भी घुटन होती है और कई बिमारियों का खतरा बना रहता है, इसका सबसे मुख्य कारण है बड़े-बड़े शहरों की बड़ी-बड़ी फैक्ट्रीयाँ। जो की सिर्फ अपने मुनाफे के लिए मानव के जिन्दगी से खिलवाड़ करती है। इन फैक्ट्रियों से बहुत बड़ी मात्रा में विषैला धुआँ वायुमंडल में फैलता है और हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करने में अहम भूमिका निभाता है।


प्रदूषण फैलाने की इस दौर में गाड़ियाँ भी कहाँ पीछे हैं बीते कई सालों में जितनी तेजी से गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है उतनी ही तेजी से प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ रही है। बहुत से शहरों में तो धुंध ही धुंध नजर आती है जिससे कि कई दुर्घटनाएं भी हो जाती है और मानव जीवन त्रस्त रहता है।

हमें 1984 की भोपाल गैस त्रासदी तो याद ही होगी यह गैस त्रासदी इतनी भयानक थी कि इसकी कल्पना करने से रोम रोम सिहर उठता है। इससे अनगिनत लोगों की जान गई और बहुत से लोग शारीरिक अपंग हो गए और एक बार फिर भोपाल की ही याद दिलाई 7 मई 2020 की विशाखापट्टनम गैस रिसाव ने। इसमें भी कई लोगों ने अपनी जान गवांँ दी। अगर इसी तरह वायु प्रदूषित होती रही तो सोचिए कैसा लगेगा जब प्रत्येक व्यक्ति के कंधे पर एक ऑक्सीजन सिलेंडर मौजूद होगा।

वायु प्रदूषण से बचाव:-

वायु प्रदूषण से हम कई तरीकों से बच सकते हैं जैसे परिवहन के क्षेत्र में गाड़ियों में पेट्रोल की जगह CNG का इस्तमाल करना चाहिए और तो और जहाँ तक हो सके लोगों को साइकिल का उपयोग करना चाहिए इससे वायु प्रदूषण कम फैलेगा और साइकिल चलाने से लोग तंदुरुस्त भी रहेंगे। बड़े-बड़े फैक्ट्रियों से बहुत जहरीला धुआँ निकलता है जिसे कम करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना चाहिए और हो सके तो फैक्ट्रियों को घनी आबादी वाले क्षेत्रों से दूर स्थापित करना चाहिए। चाहे शादी-ब्याह हो या कोई त्यौहार हमें पटाखों का इस्तमाल नहीं करना चाहिए। अधिक से अधिक पेड़ लगाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को घर से बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। कचरे को जलाना नहीं चाहिए।

जल प्रदूषण:-

जिस जल ने हमें जीवन दिया हमने उस जल को भी नहीं छोड़ा। हमने जल को इतना प्रदूषित कर दिया है कि पीने के लिए भी स्वच्छ जल प्रयाप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है और हम पानी भी खरीद कर पीने के लिए मजबूर है। इसका मुख्य कारण है बड़े-बड़े नालियों से निकलने वाले कचरे जो सीधे नदियों और तालाब में जा रहे हैं और हमारे नदियों के जल को प्रदूषित कर रहे हैं। खुले में शौच भी जल प्रदूषण मुख्य कारण है। एक ओर जहाँ बहुत लोगों को पीने के लिए साफ पानी तक नहीं मिल पा रहा है तो दुसरी ओर लोग पानी की अहमियत को नहीं समझ रहे हैं और पानी की बर्बादी कर रहे हैं।

जल प्रदूषण से बचाव:-

जल को प्रदूषित होने से रोकने के लिए शौचालय का उपयोग करना चाहिए और-तो-और नालियों की लगातार साफ सफाई करवानी चाहिए। नालियों का गंदा पानी नदियों और तालाबों में ना जाए इसके लिए भी उचित व्यवस्था करनी चाहिए। पानी को बर्बाद नहीं करना चाहिए और इसके लिए दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए।

मृदा प्रदूषण:-

एक समय था जब हमारे देश की मिट्टी सोना उगलती थी लेकिन अब ज्यादा धन कमाने की लालच में मानव हित को मानव स्वार्थ ने ढक लिया है। जिस प्रकार कचरा जल में मिलकर जल को प्रदूषित करता है उसी तरह मिट्टी में मिलकर इसे भी प्रदूषित कर देता है। मृदा प्रदूषण का मुख्य कारण है प्लास्टिक का उपयोग। प्लास्टिक कभी नहीं सड़ता है और हमारे मिट्टी की उर्वरा शक्ति को कमजोर कर देता है। ज्यादा धन कमाने के लालच में मिट्टी में जैविक खाद की जगह रसायनिक खाद का इस्तेमाल करने से भी मृदा प्रदूषित हो जाती है। कीटनाशक का उपयोग भी मृदा प्रदूषण का एक बड़ा कारण है।

मृदा प्रदूषण से बचाव:-

मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए हमें सर्वप्रथम प्लास्टिक के उपयोग पर नियंत्रण करना चाहिए। कीटनाशकों के उपयोग पर भी नियंत्रण करना चाहिए और रसायनिक खाद के जगह जैविक खाद का उपयोग करना चाहिए। हमें ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जो खुले में शौच से मुक्त हो क्योंकि खुले मैं शौच से बीमारियां भी फैलती है और हमारी मिट्टी भी प्रदूषित होती है।

ध्वनि प्रदूषण:-

वैसे तो ध्वनि प्रदूषण के कई कारण है पर इनमें से मुख्य है यातायात से होने वाला शोर। गाड़ियों के हॉर्न से इतना प्रदूषण होता है कि इंसान चिड़चिड़ा होते जा रहा है और इससे तनाव और नींद में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ध्वनि प्रदूषण के कारण भी लोगों में सुनने की क्षमता कम हो जाती है। लोग अपने मनोरंजन एवं खुशी के लिए इतना शोर शराबा करते हैं कि जिसका खामियाजा और लोगों को भुगतना पड़ता है। इससे सिर्फ मानव ही नहीं बल्कि जानवरों पर भी असर होता है। यह जानवरों के लिए भी बहुत खतरनाक है।

ध्वनि प्रदूषण से बचाव:-

ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए हमें सर्वप्रथम गाड़ियों के ध्वनि पर नियंत्रण करना चाहिए। हमें सड़क के दोनों ओर पौधारोपण करना चाहिए। शादी ब्याह में disc jockey पर भी रोक लगानी चाहिए।

इस तरह के कुछ प्रयासों से प्रदूषण को रोका जा सकता है। प्रदूषण को रोकना अपने आप में बहुत बड़ी बात है लेकिन हम सभी मिलकर इस ओर कदम बढ़ाए तो यह भी संभव है। हमें आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि आप प्रदूषण को फैलने से रोकने की ओर कदम जरूर बढ़ाएंगे और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करेंगे।

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वर्तमान समय में प्रकृति का महत्व

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Image Credit : Image credit : Pixabay (Pexels)

प्रकृति शुरू से ही हमारे लिए पूजनीय है और हो भी क्यूं ना। प्रकृति ने हीं तो हमें सब कुछ दिया है चाहे पेट की भूख मिटानी हो या कुछ और। सब कुछ तो हमें प्रकृति से ही मिला है। यही कारण है की ऋषिमुनी शुरू से ही इसकी पुजा करते है।

लेकिन आज के समय में मानव ने प्रकृति का इतना अपमान किया की पृथ्वी भी कराहने लगी। हमने अपने ऐसो-आराम के लिए पृथ्वी को काफी नुकसान पहुँचाया। हमने हर क्षेत्र में अपनी सुविधाओं के लिए कहीं ना कहीं पृथ्वी को बहुत नुकसान पहुँचाया। आज हम अपना जीवन सुगम बनाने के लिए पेड़ तक काटते जा रहे हैं। आज हम ये भूल गए हैं कि “प्रकृति नहीं तो हम भी नहीं।”

लेकिन कहते है ना कि अपने कर्मों का फल हमें इसी जीवन में मिलता है। आज हमें उसी का फल मिल रहा है, कोरोना महामारी के रुप में। आज कोरोना से पूरी दुनिया त्रस्त है। इससे अनगिनत लोग अपनी जान गँवा चुके हैं और जो बचे हुए हैं उनके जीवन जीने का तरीका एकदम बदल गया है या यूँ कहें कि पूरी दुनिया हीं बदल गयी है। एक ओर जहाँ पूरी दुनिया इससे परेशान है वहीं दूसरी ओर प्रकृति खुद अपने पुराने रुप में आ रही है।

प्रकृति पहले से ज्यादा स्वच्छ हो रही है। आसमान साफ हो रहे हैं, नदियाँ स्वच्छ हो रही है। जहाँ दुनिया अलार्म से उथती थी वो दुनिया अब पक्षियों की चहचहाने से उठ रही है।

पूरी दुनिया लॉकडाउन के कारण रुकी हुई है और प्रकृति अपने असली रुप में आ रही है। फैक्ट्री, गाड़ियाँ आदी बंद होने से प्रदूषण में भारी कमी आई है। जिस नदी को साफ करने के लिए सरकार करोड़ों रुपय खर्च कर रही थी वो आज अपने वास्तविक रुप में आ गयी है।

पर्यावरण को हमने इतना दूषित कर दिया था कि इसमे साँस लेने से भी बीमारियों का डर बना रहता था। प्रकृति से हमने इतना छेड़छाड़ किया है की आज इन्सान दवाईयों पर जी रहा है। आज इस कोरोना के कारण जिस प्रकार हम जानवरों को कैद रखते थे उसी तरह लोग अपने-अपने घरों में कैद है। सड़के खाली है लेकिन प्रकृति अपनी हरियाली हर ओर बिखेर रही है।

अब हमारे आगे सवाल ये है कि “क्या जब दुनिया कोरोना के कहर से आजाद हो जाएगी तो फिर से प्रकृति अस्वच्छ होने लगेगी?”, “हम प्रकृति को फिर से दूषित तो नहीं कर देंगे?”

दुनिया ने हमें फिर से एक मौका दिया है कि हम पृथ्वी को स्वच्छ रखें। हम सब मिलकर पेड़ लगायें और पूरी दुनिया को फिर से हरा भरा बनाएँ।

हमें यह प्रण लेना होगा कि हम  प्रकृति की स्वच्छता के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। जहाँ तक हो सके अपनी गाड़ियों की जगह सायकिल का इस्तेमाल करेंगे। पेड़ को नही काटेंगे एवं स्वयं भी पेड़ लगायेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। नदियों को भी दूषित नहीं करेंगे।

हममे से कुछ लोग का ये कहना रहता है क्या सिर्फ मेरे ये करने से पूरा पर्यावरण स्वच्छ हो सकता है तो उनसे मेरा बस यही कहना है की आप इस काम में अकेले नहीं हैं। इस काम में हम सब एक साथ हैं।

महत्मा गाँधी जी ने भी कहा था- “वह बदलाव खुद में पहले करो जो तुम दुनिया में देखना चाहते हो।”

इसलिये पहले आप खुद अपने जीवन में वो परिवर्तन लाईये।

Read more article : Environmental pollution, Climate change.

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